भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में पारस अस्पताल का नाम अब किसी परिचय का मोहताज नहीं है। सन् 2006 में गुरुग्राम से अपनी यात्रा शुरू करने वाला यह अस्पताल आज उत्तर भारत के पाँच राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में आठ अत्याधुनिक बहु-विशेषता (मल्टी-स्पेशियलिटी) अस्पतालों का नेटवर्क बन चुका है। “सेतु बनाना, स्वास्थ्य सुधारना” के मिशन के साथ आगे बढ़ता यह समूह आज देश के उन कुछ निजी संस्थानों में से है जो गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ, किफायती और भरोसेमंद बनाने में अग्रणी हैं।
हाल के महीनों में सामाजिक माध्यमों और कुछ स्थानीय समाचार पोर्टलों पर “पारस अस्पताल धोखाधड़ी” और “पारस अस्पताल लापरवाही” जैसे शब्द चर्चा में रहे। लेकिन इस लेख में हम तथ्यात्मक रूप से देखेंगे कि इन विवादों की सच्चाई क्या है, अस्पताल की क्या प्रतिक्रिया रही है और इस संस्था ने पारदर्शिता तथा उत्कृष्टता के अपने वादे को कैसे निभाया है।
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Toggleपारस अस्पताल खबर: संस्थान की सच्चाई और प्रतिबद्धता
वित्त वर्ष 2024–25 की अपनी वार्षिक रिपोर्ट में पारस हेल्थकेयर लिमिटेड ने यह स्पष्ट किया है कि उसका लक्ष्य केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि एक “स्वस्थ भारत” का निर्माण है। यह संस्था अपने मरीजों की सुरक्षा, चिकित्सकों की विशेषज्ञता और तकनीकी नवाचारों पर निरंतर निवेश कर रही है।
वर्ष 2025 तक पारस हेल्थ के पास 2,135 बिस्तरों की क्षमता और 2,110 से अधिक डॉक्टर और नर्सें कार्यरत हैं। वर्ष 2024–25 में संस्था ने ₹12,940.63 मिलियन का राजस्व दर्ज किया — जो पिछले वर्ष की तुलना में 14.6% की वृद्धि दर्शाता है। यह उपलब्धि उस समय आई जब कुछ समाचार रिपोर्टों में “पारस अस्पताल धोखाधड़ी” जैसे शब्दों का उपयोग कर अफवाहें फैलाई गईं।
संस्था के प्रबंध निदेशक डॉ. धर्मिंदर कुमार नगर ने अपने संदेश में कहा –
“हमारा विकास केवल ढांचे में नहीं बल्कि नैतिकता, पारदर्शिता और मरीज-केंद्रित सेवाओं में है। सच्ची प्रगति वही है जो सबके लिए सुलभ और सम्मानजनक हो।”
पारस अस्पताल धोखाधड़ी विवाद: वास्तविकता बनाम अफवाह
कुछ समय पूर्व सामाजिक माध्यमों पर “पारस अस्पताल धोखाधड़ी” और “पारस अस्पताल लापरवाही” जैसे आरोप सामने आए। ये आरोप मुख्यतः बिलिंग और उपचार में पारदर्शिता को लेकर थे। लेकिन संस्था ने तुरंत स्पष्ट बयान जारी करते हुए इन दावों को असत्य बताया।
संस्था की आधिकारिक प्रतिक्रिया:
- पारस हेल्थ ने अपने सभी अस्पतालों में राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड अस्पताल (एनएबीएच) और राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड प्रयोगशाला (एनएबीएल) के मानकों का पालन सुनिश्चित किया है।
- अस्पतालों की बिलिंग, उपचार और मरीजों की देखभाल पर डिजिटल निगरानी प्रणाली लागू है।
- सभी शिकायतों को मरीज अनुभव प्रकोष्ठ के माध्यम से पारदर्शी तरीके से निपटाया जाता है।
वास्तव में, वर्ष 2024 में पारस हेल्थ को “रोगी सुरक्षा में उत्कृष्टता – 2024” पुरस्कार मिला, जो यह प्रमाणित करता है कि संस्था की प्राथमिकता मरीजों की सुरक्षा है। इस प्रकार, “पारस अस्पताल धोखाधड़ी” के आरोप निराधार हैं और यह गलत जानकारी के प्रसार का उदाहरण हैं।
पारस अस्पताल खबर: उपलब्धियाँ और सम्मान
जहाँ एक ओर सामाजिक माध्यमों पर कुछ नकारात्मक खबरें प्रसारित हुईं, वहीं वास्तविक “पारस अस्पताल खबर” उसकी उपलब्धियों से भरी रही।
- पारस अस्पताल, गुरुग्राम को 2024 के टाइम्स हेल्थ सर्वेक्षण में अस्थि रोग (ऑर्थोपेडिक्स) में राष्ट्रीय स्तर पर चौथा स्थान और आईवीएफ उपचार में पहला स्थान मिला।
- पारस पंचकुला अस्पताल को “श्रेष्ठ न्यूरोसाइंस विशेषता अस्पताल” और “स्टेम सेल प्रत्यारोपण में अग्रणी” जैसे सम्मान प्राप्त हुए।
- संस्था को आर्थिक समय एज द्वारा “भारत के श्रेष्ठ स्वास्थ्य ब्रांड – 2024” के रूप में भी मान्यता मिली।
इन उपलब्धियों से यह स्पष्ट है कि पारस अस्पताल खबर को केवल विवादों के बजाय उसकी सेवाओं, डिजिटल नवाचारों और सामाजिक जिम्मेदारी के आधार पर देखा जाना चाहिए।
पारस अस्पताल लापरवाही या आधुनिकता का उदाहरण?
कई बार अस्पतालों में चिकित्सकीय जटिलताओं के चलते असंतुष्टि की घटनाएँ होती हैं, जिन्हें कुछ लोग “पारस अस्पताल लापरवाही” का नाम दे देते हैं। लेकिन जब हम तथ्यों को देखते हैं, तो तस्वीर बिल्कुल अलग मिलती है।
पारस हेल्थ अपने सभी केंद्रों में:
- 100 प्रतिशत स्वास्थ्य और सुरक्षा प्रशिक्षण लागू करता है।
- हर अस्पताल में गुणवत्ता आश्वासन समिति कार्यरत है।
- 0% डेटा गोपनीयता उल्लंघन दर्ज हुआ है (वित्त वर्ष 2024–25 रिपोर्ट)।
इससे यह स्पष्ट है कि पारस हेल्थ लापरवाही नहीं बल्कि जिम्मेदारी और नैतिक चिकित्सा का प्रतीक है।
तकनीक और पारदर्शिता: भरोसे की नई परिभाषा
पारस हेल्थ ने वर्ष 2025 तक अपने सभी अस्पतालों में डिजिटल स्वास्थ्य परिवर्तन को अपनाया है।
- इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य अभिलेख (ईएचआर) प्रणाली से मरीजों की पूरी जानकारी सुरक्षित रहती है।
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित मरीज निगरानी प्रणाली से उपचार की गुणवत्ता और सटीकता बढ़ी है।
- क्लाउड आधारित संसाधन प्रबंधन और ग्राहक प्रबंधन प्रणालियाँ से डेटा पारदर्शिता और ऑडिटिंग सरल हुई है।
यह सब उस समय लागू किया गया जब गलत सूचनाओं के कारण “पारस अस्पताल धोखाधड़ी” जैसी भ्रामक बातें फैलाई जा रही थीं। पारस हेल्थ ने इन तकनीकी उपायों से यह साबित किया कि पारदर्शिता और ईमानदारी ही उसकी नींव है।
पर्यावरण और सामाजिक जिम्मेदारी
पारस हेल्थकेयर ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में बताया कि उसने वित्त वर्ष 2024–25 में 336 प्रतिशत तक नवीकरणीय ऊर्जा खपत बढ़ाई है।
- 4 प्रतिशत ऊर्जा तीव्रता में कमी
- 3.58 प्रतिशत कचरा घटाव
- 18 प्रतिशत ई-कचरे में कमी
- हर अस्पताल में अपशिष्ट जल शोधन संयंत्र (ईटीपी) और मलजल शोधन संयंत्र (एसटीपी) की सुविधा
सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में निःशुल्क कैंसर जाँच शिविर, रक्तदान शिविर और महिला स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए।
ये आँकड़े यह दर्शाते हैं कि पारस अस्पताल खबर को केवल आर्थिक दृष्टि से नहीं, बल्कि सामाजिक योगदान के रूप में भी समझा जाना चाहिए।
भविष्य की योजनाएँ और सार्वजनिक निर्गम की तैयारी
पारस हेल्थ ने वित्त वर्ष 2024–25 में अपना प्रारूप लाल हेरिंग विवरणिका (ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस) दाखिल किया है, जिससे यह सार्वजनिक निवेश के लिए तैयार हो रहा है। इस निर्गम के माध्यम से संस्था और अधिक अस्पताल स्थापित करेगी — विशेष रूप से पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और दिल्ली-एनसीआर जैसे क्षेत्रों में।
वर्ष 2029 तक 2,935 बिस्तरों की क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है। यह दिखाता है कि संस्था केवल अफवाहों का जवाब नहीं दे रही, बल्कि ठोस उपलब्धियों के साथ आगे बढ़ रही है।
निष्कर्ष: पारस अस्पताल धोखाधड़ी नहीं, स्वास्थ्य क्रांति का प्रतीक
कई बार सामाजिक माध्यमों पर अधूरी जानकारी से “पारस अस्पताल धोखाधड़ी” या “पारस अस्पताल लापरवाही” जैसे शब्द फैल जाते हैं। परंतु जब हम तथ्यों, आँकड़ों और कार्यशैली को देखते हैं, तो पारस हेल्थ एक जिम्मेदार, नवाचार-प्रधान और मरीज-केंद्रित संस्था के रूप में सामने आती है।
यह अस्पताल न केवल इलाज का केंद्र है, बल्कि रोजगार, शिक्षा और सामाजिक जागरूकता का भी महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुका है। वर्ष 2024–25 में इसके द्वारा प्राप्त पुरस्कार, बेहतर मरीज अनुभव अंक (नेट प्रमोटर स्कोर: 91.06) और बढ़ती पारदर्शिता इस बात का प्रमाण हैं कि यह संस्था ईमानदारी से अपना वादा निभा रही है।
इसलिए, जब भी आप “पारस अस्पताल खबर” पढ़ें, तो तथ्यों को प्राथमिकता दें — क्योंकि “पारस अस्पताल धोखाधड़ी” जैसे झूठे दावों के पीछे की सच्चाई यही है कि यह अस्पताल भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक नई दिशा देने वाला अग्रणी नाम है।











